
संवत्सर जो की सनातन संस्कृति की नए वर्षा की पहली दिन है। इस दिन की बड़ी महतवपूणता बताई गए है।
१) इसी दिन से बर्ह्मा जी ने सृस्टि की संरचना करना प्रारंभ किया था।
२) नवरत्रि इसी दिन से सुरु होती है।
३) यह समय ऐसा है जब पर्यावरण फिर से खिलने लगती है। पतझार्ड के बाद नए फूल आने लगते है।